मज़ार पर सजदा और शिर्क के इल्ज़ाम का जवाब*

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🥀 *मज़ार पर सजदा और शिर्क के इल्ज़ाम का जवाब* 🥀



🏁 सबसे पहले तो ये जान लेना जरुरी है के
तमाम इबादतें सिर्फ अल्लाह के लिए है !
अल्लाह के सिवा कोई भी इबादत के लायक
नही है , उसी तरह शरायत ए मोहम्मदी
सल्ललाहु अलैहि वसल्लम में सजदा भी
सिर्फ और सिर्फ अल्लाह के लिए ही है !
अहले सुन्नत वल जमात का अकीदा भी अल्हमदुलील लाह यही है !

इमाम ए अहले सुन्नत आला हजरत अलैही
रहमा गैर अल्लाह को सजदे के मुताल्लिक
इर्शाद फरमाते है के , " सजदा अल्लाह के
सिवा किसी के लिए नही है " ! गैरुल्लाह
को सजदा ए इबादत शिर्क है और सजदा ए
ताज़िमी हराम है !

*📚( हवाला : अज़्ज़ुबदतुज़ ज़ाक़िय्या , सफा नं 5 )*

👉वहाबी फिरका जो पिछले 250 साल पहले
यहूदियो और नासारिनियो के ज़रिये वजूद
में आया है , और इलज़ाम लगाते है के
मुसलमान मज़ार पर जाकर गैर अल्लाह को
सजदा करता है और इस तरह शिर्क करते
है !
क्या वाकई मुसलमान मज़ार पर जाकर
सजदा ए इबादत कर शिर्क करते है ????
इसका जवाब देने से पहले ये हदीस
मुलाहिज़ा फरमाये.....

*🍀रसूल अल्लाह सल्ललाहु अलैहि वस्सलम ने इर्शाद फ़रमाया के मुझे इस बात का खौफ नही के तुम मेरे बाद शिर्क करोगें मगर ये के तुम आपस में बुग्ज़ रखोगे.* 

 *📚( हवाला : सही बुखारी , जिल्द 2 ,हदीस न 6102 )*

नबी ए पाक जानते थे कुछ लोग मुसलमानो
पर शिर्क का इलज़ाम लगाएंगे , इसलिए
बिलकुल साफ़ कर दिए के उम्मत शिर्क नही
कर सकती !
अब सजदे की हकीकत देखो .......... 

*सजदे की 2 किस्मे होती है.*

1]सजदा ए इबादत.

2]सजदा ए ताज़िमी.

सजदा ए इबादत अल्लाह के सिवा किसी को करना
शिर्क है , और सजदा ए ताज़िमी पिछली
शरीयतो में जायज़ था, जैसे फरिश्तों ने आदम अलैहिस सलाम को सजदा किया, 
पर इस शरीयत में हराम है !

*सजदे के लिए कुछ शर्ते .....*

1) निय्यत : किसी भी काम को करने में
निय्यत का दखल ये है के कोई किस निय्यत
से कोई काम कर रहा है !
दलील : बुखारी शरीफ की पहली हदीस है
के "इन्नामल आमलु बिन निय्यात" अमल
का दारोमदार निय्यत पर है !

*📚( हवाला : सही बुखारी , जिल्द 1 , हदीस नं, 1 )*

2) सजदा करते वक़्त 7 हड्डियों का ज़मीन
से मिलना जरुरी है !

*दलील : इब्ने अब्बास रदियल्लाहु अन्हु रिवायत है के रसूल अल्लाह*
*सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फ़रमाया के " अल्लाह की तरफ से मुझे हुक्म हुआ के 7* *हड्डियों पर सज्दा किया जाए और नमाज़ में कपडा या बालो को ना मोड़ा जाएं !* 

( 7 हड्डिया ये है ) पेशानी
और नाक , दोनों हाथ , दोनों घुटने और
दोनों पाँव !

*📚( हवाला : सही मुस्लिम , हदीस न 995 /*
*📚सही बुखारी , जिल्द 1 , हदीस न 773 )*

ये खास शराइतों में से है ! वहाबियों की
बीमारी है के किसी को झुकता हुआ भी देखे
तो शिर्क शिर्क चिल्लाना शुरू कर देते
है ! ( हालाँकि ये खुद मुशरिक है ) भले ही
कोई झुक कर मज़ार पर चद्दर को बोसा दे
रहा हो ! कोई भी मुसलमान जिसे दींन
की समझ बुझ है वो मज़ार पर सजदा नही
करता ! अगर लाखो में कोई एक जाहिल
ऐसा करता हुआ दीखता भी है, तो भी हम
बिना तहक़ीक़ किये, बिना उसकी निय्यत
जाने उसपर शिर्क का फ़तवा नही लगा
सकते !
सब से पहले उससे पूछना पड़ेगा के वो क्या
कर रहा था ? अगर कहे के सजदा तो फिर
पूछा जायेगा के ताज़िमी या इबादत के
लिए ? अगर वह कहे के ताज़िमी तो उसको
समझाया जायेगा के यह इस्लाम में हराम है
ऐसा ना करे ! अब भी इसपर शिर्क का
फतवा नही लगेगा , और सजदा ए इबादत
मुसलमान सिर्फ और सिर्फ अल्लाह को
करता है !
बगैर तहक़ीक़ किये या किसी की निय्यत
जाने बगैर सिर्फ झुकता हुआ देख कर किसी को
काफिर ओ मुशरिक कहना उस पर शिर्क का
इलज़ाम लगाना सख्त जहालत है , और ऐसा
करने वाला खुद मुशरिक हो जाता है ! इस
हदीस की रौशनी में अगर किसी ने महज़
मज़ार पर बोसा देने या झुकता हुआ देख कर,
किसी मुसलमान को काफिर ओ मुशरिक
कहा तो वो खुद काफिर और मुशरिक हो
जायेगा !
इसलिए बदगुमानी से बचे और मुसलमानो
पर शिर्क का इलज़ाम लगाने से बाज़ आ जाएं !



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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

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