मुर्दों का सुनना
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_*🥀अल्लाह के नबीयों और वलीयों के मज़ार पर जाना और उनसे मदद मांगना क़ुरआन व हदीस से साबित है🥀*_
_*मुर्दो का सुनना👇*_
_*8). अल्लाह तआला फ़ररमाता है*_
_*तर्जमा : तो सालेह ने उनसे मुंह फेरा और कहा एै मेरी क़ौम बेशक मैंने तुम्हें अपने रब की रिसालत पहुंचा दी*_
_*📚 पारा 8, सुरह एराफ, आयात 79*_
_*तफसीर - हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम क़ौमे समूद की तरफ नबी बनाकर भेजे गए,क़ौमे समूद के कहने पर आपने अपना मोअजज़ा दिखाया कि एक पहाड़ी से ऊंटनी ज़ाहिर हुई जिसने बाद में बच्चा भी जना, ये ऊंटनी तालाब का सारा पानी एक दिन खुद पीती दुसरे दिन पूरी क़ौम, जब क़ौमे समूद को ये मुसीबत बर्दाश्त न हुई तो उन्होंने इस ऊंटनी को क़त्ल कर दिया, तो आपने उनके लिए अज़ाब की बद्दुआ की जो के क़ुबूल हुई और वो पूरी बस्ती ज़लज़ले से तहस नहस हो गयी, जब सारी क़ौम मर गई तो आप उस मुर्दा क़ौम से मुखातिब होकर अर्ज़ करने लगे जो के ऊपर आयत में गुज़रा*_
*📚ऊंटन तफसीरे सावी, जिल्द 2, सफह 73*_
_*9) हदीस शरीफ़ - जंगे बद्र के दिन हुज़ूर सल्लललाहू तआला अलैहि वसल्लम ने बदर के मुर्दा कुफ्फारों का नाम लेकर उनसे ख़िताब किया, तो हज़रत उमर फारूक़े आज़म ने हैरत से अर्ज़ किया कि क्या हुज़ूर मुर्दा बेजान जिस्मों से मुखातिब (बात करते) हैं तो सरकार सल्लललाहू तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि ऐ उमर खुदा की क़सम ज़िंदा लोग इनसे ज़्यादा मेरी बात को नहीं समझ सकते'*_
_*📚 बुखारी, जिल्द 1, सफह 183*_
_*👉ज़रा सोचिये कि जब काफिरों के मुर्दो में अल्लाह ने सुनने की सलाहियत दी है तो फिर अल्लाह के मुक़द्दस बन्दे नबी और वली हमारी आवाज़ों को क्यों नहीं सुन सकते, ज़रूर सुन सकते हैं*_
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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*
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