मजार पर फूल डालना

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_*🥀अल्लाह के नबीयों और वलीयों के मज़ार पर जाना और उनसे मदद मांगना क़ुरआन व हदीस से साबित है🥀*_



_*​मज़ार पर फूल डालना​👇🏻*_

_*7) हदीस शरीफ़ - हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का गुज़र दो क़ब्रो के क़रीब से हुआ तो आपने फरमाया कि इन दोनों पर अज़ाब हो रहा है और किसी बड़े गुनाह की वजह से नहीं बल्कि मामूली गुनाह की वजह से, एक तो पेशाब की छींटों से नहीं बचता था और दूसरा चुगली करता था, फिर आपने एक तर शाख🌿 तोड़ी और आधी आधी करके दोनो क़ब्रों पर रख दी और फरमाया कि जब तक ये शाख तर रहेंगी तस्बीह करती रहेंगी जिससे कि मय्यत के अज़ाब में कमी होगी*_

_*📚 बुखारी, जिल्द 1, हदीस 218*_

_*👉इस हदीस शरीफ़ से साबित हुआ के तर शाख अल्लाह तआला की तस्बीह करती है ​जब तर शाख तस्बीह करती है तो फिर फूल भी करेगा क्योंके वो भी तर और ख़ुशबू दार होता है और जब इनकी बरक़त से अज़ाब में कमी हो सकती है तो एक मुसलमान के क़ुरआन की तिलावत व दुरूद व वज़ाइफ से तो और भी ज़्यादा सवाब पहुंचेगा, याद रहे साहिबे मज़ार पर यक़ीनन अज़ाब नहीं होता क्योके वो अल्लाह तआला के नेक मक़बूल बंदे हैं मगर फूलों की तस्बीह से साहिबे मज़ार ख़ुश होते हैं और दुरूद व फ़ातिहा से उनके दरजात बुलंद होते हैं,*_



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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*

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