मजार पर हज़री

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_*🥀अल्लाह के नबीयों और वलीयों के मज़ार पर जाना और उनसे मदद मांगना क़ुरआन व हदीस से साबित है🥀*_


_*​​ मजार पर हजरी👇🏻*_

_*4). मसअला - आलाहज़रत अज़ीमुल बरकत फरमाते हैं कि साहिबे मज़ार के पांव की जानिब से दाखिल हो और मज़ार से 4 हाथ पीछे हटकर खड़ा हो हाथ बांधकर जो कुछ सही अदायगी से पढ़ सकता हो पढ़े और उसका सवाब तमाम अम्बिया व औलिया सिद्दिक़ीन व सालेहीन व साहिबे मज़ार और तमाम मुसलमान मुर्दों को बख्शे और इसी तरह वापस निकल आये, ना तो मज़ार को हाथ लगाये और ना चादर चूमे लेकिन अगर कोई चूम भी लेता है तो ये कोई नाजाइज़ और हराम भी नहीं है, और मज़ार पर औरतों का जाना बिल्कुल नाजाइज़ और हराम है बल्कि फरमाते हैं कि जब तक वो औरत अपने घर वापस नहीं आ जाती तब तक अल्लाह और उसके फरिश्ते और साहिबे मज़ार सब की लानत में गिरफ्तार रहती है*_

_*📚 अलमलफूज़, हिस्सा 2, सफह 107*_

_*✏️मज़ार पर हाज़िर होकर मांगने का 3 तरीका है पहला ये कि मौला तआला की बारगाह में युं अर्ज़ करे के ऐ मौला मैं तुझसे इस वली के सदक़े में फलां हाजत (ज़रूरत) तलब करता हूं मेरी हाजत पूरी फरमा दूसरा ये के साहिबे मज़ार से युं अर्ज़ करे के ऐ अल्लाह के मुक़द्दस बन्दे मेरी फलां इल्तिजा रब की बारगाह में पेश कर दीजिये कि मेरी हाजत पूरी फरमा दे और तीसरा तरीक़ा वो है जिस पर बन्दे का अमल है वो ये कि सीधे सीधे साहिबे मज़ार की बारगाह में युं इस्तेगासा पेश करे और कहे कि ऐ अल्लाह के वली मेरी फलां हाजत पूरी फरमाइये ऐसा इसलिए क्योंकि अल्लाह ने अपने वलियों को पूरी क़ुदरत अता फ़रमाई है वो जिसे जो चाहें अता कर सकते हैं, और अगर डायरेक्ट वली से मांगने की बात किसी को हज़म नहीं हो रही हो तो वो इस मिसाल से समझ ले, मान लीजिये कि आपको 10,000 रू रूपये की ज़रूरत है आप अपने अब्बा के पास पहुंचे और युं कहें कि ऐ मौला मुझे 10,000 रू की ज़रूरत है मेरे बाप से मुझे 10,000 दिलवादे या फिर युं कहें कि ऐ अब्बा मुझे 10,000 रू की ज़रूरत है आप रब से दुआ कर दीजिए कि मुझे 10,000 रू अता कर दिया जाए या फिर युं कहें कि ऐ अब्बा मुझे फलां काम आ गया है मुझे 10,000 रू चाहिए,*_

_*ख्याल रहे कि अगर वली गैरुल्लाह हैं और गैरुल्लाह से कुछ मांगना शिर्क है तो फिर अपने बाप से मां से भाई बहन से दोस्तों अज़ीज़ों से भी डायरेक्ट मांगना शिर्क होना चाहिए क्योंकि वो भी गैरुल्लाह हैं या फिर वहाबी देवबंदी अपने अज़ीज़ो अक़ारिब को खुदा समझकर अपनी ज़रूरत की चीज़ें मांगता होगा जब ही तो उनसे मांगना उनके नज़दीक शिर्क नहीं और नबी और वली से मांगना शिर्क है और अगर ये शिर्क नहीं है तो फिर नबी और वली से मांगना भी शिर्क नहीं है, क्योंके नबी और वली अपनी क़बरों में ज़िन्दा हैं,*_

_*👉इसीलिए आलाहज़रत फ़रमाते हैं*_

_*🌹तू ज़िन्दा है वल्लाह तू ज़िन्दा है वल्लाह*_
_*मेरे चश्मे आलम से छुप जाने वाले 🌹*_

_*वलियों से डायरेक्ट मांगने की बहुत सारी रिवायतें मौजूद हैं इन्शा अल्लाहुर्रहमान फिर कभी मौक़ा मिलने पर सुबूत पेश किए जाएंगे,*_



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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*

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